उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम लिमिटेड, लखनऊ

(उत्तर प्रदेश सरकार का उपक्रम)

जलाशय प्रबंधन, उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम लिमिटेड, लखनऊ

जलाशय प्रबंधन

उत्तर प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 1981-82 में दो जलाशयों की प्रबन्ध व्यवस्था का कार्य निगम को मत्स्य विभाग से हस्तान्तरित किया गया। मत्स्य विकास निगम द्वारा कुशल प्रबन्ध व्यवस्था करके इनकी आय मे कई गुना बढ़ोत्तरी कर दी गयी, जिसके फलस्वरूप शासन द्वारा 1983-84 में 11 अन्य 'ए' श्रेणी के जलाशयों को निगम की प्रबन्ध व्यवस्था के अन्तर्गत हस्तान्तरित कर दिया गया। उत्तरांचल राज्य के गठन के फलस्वरूप 5 जलाशय नानकसागर, बैगुल, धौरा, तुमरिया व बौर उत्तरांचल राज्य को हस्तान्तरित कर दिये गये हैं तथा आंशिक रूप से उत्तर प्रदेश व उत्तरांचल राज्य में स्थिति शारदासागर जलाशय का प्रबन्धन निगम द्वारा किया जा रहा है तथा जलाशय की आय का विभाजन दोनो राज्यों में जलाशय के पड़ने वाले क्षेत्रफल के अनुपात में किया जा रहा हैं। इसके अतिरिकत शासन द्वारा निगम को वर्ष 2003-04 में सिंचाई विभाग के चार जलाशय राजघाट, उर्मिल, रोहिणी व चित्तौड़गढ हस्तान्तरित किये गये हैं।

राजघाट जलाशय का आंशिक क्षेत्रफल उत्तर प्रदेश तथा आंशिक क्षेत्रफल मध्य प्रदेश में होने के कारण राजघाट जलाशय में मत्स्य प्रबन्ध/विकास व मत्स्य आखेट के ठेके के निस्तारण के सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में बनी आपसी सहमति के क्रम में उक्त जलाशय का प्रबन्धन संयुक्त रूप से उ0प्र0 मत्स्य विकास निगम लि0 व मध्य प्रदेश मत्स्य महासंघ द्वारा वर्ष 2011-12 से किया जा रहा है।

वर्ष 2015-16 में सिंचाई विभाग के 14 जलाशय निगम को प्रबन्ध व्यवस्था हेतु हस्तानान्तरित किये गये हैं, जिसमें से पथरई, बलुई, गुन्ता, लतीफशाह व मौदहा जलाशयों का निस्तारण निविदा-सह-नीलामी के माध्यम से कराया जा रहा है। घोरी, सुखरा, ढेंकुवा, बछरा व भोकवा जलाशय श्रेणी-3 के अन्तर्गत वर्गीकृत हैं। जलाशयों के निस्तारण सम्बन्धी शासनादेश में श्रेणी-3 के जलाशयों के निस्तारण हेतु निगम के लिए व्यवस्था निर्धारित न होने के कारण उक्त शासनादेश में संशोधन हेतु प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया गया है। शासन स्तर से संशोधित शासनादेश निर्गत होने के उपरान्त उक्त जलाशयों के निस्तारण की कार्यवाही कराई जायेगी। वनघोघवा, रामपुर, खेरभान व मोतीपुर जलाशय पक्षी विहार (सेन्चुरी) घोषित होने के कारण उक्त जलाशयों का निस्तारण नहीं कराया जा सकता है।

निगम के प्रबंधाधीन जलाशयों से प्राप्त आय की एक तिहाई धनराशि का भुगतान निगम द्वारा सिंचाई विभाग को रायल्टी के रूप में किया जा रहा है।

शासनादेश सं०– 3563/12-मत्स्य-83 दिनांक- 12/08/1983 के द्वारा वर्ष 1983-84 में निगम का प्राप्त 11 जलाशयों में अवशेष जलाशयों का विवरण

क्रम सं० जलाशय का नाम मण्डल का नाम जनपद का नाम क्षेत्रफल (हे0 में) अन्य विवरण
1 शारदासागर बरेली पीलीभीत 6880 नीलाम किये जाने है।
2 माताटीला झाँसी झाँसी 10360 कार्यशील
3 कमलासागर झाँसी झाँसी 2460 कार्यशील
4 गोबिन्दसागर झाँसी झाँसी 2428 कार्यशील
5 जामिनी झाँसी ललितपुर 2266 नीलाम किये जाने है।
6 चन्द्रावल चित्रकूट हमीरपुर 1139 नीलाम किये जाने है।
7 सिरसी विन्धयाचल मिर्जापुर 4144 कार्यशील
8 जिरगो विन्धयाचल मिर्जापुर 3108 कार्यशील