उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम लिमिटेड, लखनऊ

(उत्तर प्रदेश सरकार का उपक्रम)

मत्स्य बीज उत्पादन, उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम लिमिटेड, लखनऊ

मत्स्य बीज उत्पादन

हैचरियों पर मत्स्य बीज उत्पादन का वार्षिक कलेन्डर

प्रदेश में गुणवत्ता पूर्वक मत्स्य बीज उपलब्ध कराये जाने हेतु उ०प्र० मत्स्य विभाग निगम लि० की 09 हैचरियॉ कार्यरत हैं,जिन पर होने वाले वार्षिक कार्य कलापों का माह वार विवरण निम्नवत् हैः-

माह: अप्रैल

हैचरियों पर विभिन्न तालाबों में संबर्धित मत्स्य कल्चर (एयरलिंग) को एकत्र कर उनमें से मत्स्य श्रावक के रूप में परिवर्तित होने वाले एयरलिंग को अलग तालाबों में पोषण किया जाता है। शेष कल्चर को विक्रय हेतु स्थानीय बाजार की विक्रय दर प्राप्त कर मुख्यालय को सूचित करते हुए विक्रय का कार्य किया जाता है।

उपलब्ध कामन कार्प बीज के लक्ष्यों के अनुरूप विक्रय का कार्य मत्स्य विभागीय अधिकारियों⁄कर्मचारियों निजी क्षेत्र के मत्स्य पालकों से सम्पर्क कर किया जाता है।

श्रावकों के पृथकीकरण हेतु तालाबों की तैयारी के अन्तर्गतः-

अ- जलीय वनस्पतियों का उन्मूलन

ब- तालाबों में आवश्यकतानुसार महुआ की खली का प्रयोग

स- तालाबों में चूने का प्रयोग

द - तालाबों में जैविक व रसायनिक उर्वरक का प्रयोग

उपरोक्त के साथ-साथ हैचरी पर उपलब्ध जल संसाधन के उपकरण जैसे-मोटर, डीजल इंजन, जनरेटर आदि के रख–रखाव/तैयारी एवं मत्स्य श्रावकों के तालाबों में लगभग 30 प्रतिशत जल का बदलाव करते हुए श्रावकों का उचित पोषण कर उनके जननागों के विकास का कार्य किया जाता है।

माह: मई

श्रावकों का लैगिंग आधार पर पृथकीकरण का कार्य श्रावकों के रोगों के बचाव हेतु उचित दवाओं आदि का प्रयोग किया जाता है।

नर्सरी तैयारी के अन्तर्गत तालाबों का आवश्कतानुसार सुखाना एवं जलीय घास तथा जलीयें कीडों के उन्मूलन का कार्य।

उक्त के साथ–साथ सम्बन्धित उपनिदेशक मत्स्य से विचार विमर्श कर प्रजनन एवं मत्स्य बीज वितरण कार्यक्रम का निर्धारण तथा श्रावकों का पोषण जननागों के विकास के अनुरूप उनके भार का लगभग 2 प्रतिशत तक पूरक आहार में मिनरल मिक्स का मिश्रण कर फीडिंग करना। इसी माह में माह जून में मत्स्य पालकों/मत्स्य विभाग के जनपदीय अधिकारियों की मांग के आधार पर अरली ब्रीडिंग का कार्य कराया जाता है।

माह: जून

नर्सरियों की तैयारी हेतु महुआ की खली, चूने एवं खादीकरण के कार्य

महुआ की खली का उपयोग

महुआ की खली का प्रयोग अवांछित मछलियों का उन्मूलन एवं नर्सरी को उपजाऊ शक्ति में वृद्धि करना होता है इसका प्रयोग 1 से 2 फिट पानी के स्तर पर 10 कु० प्रति है० डी आयल्ड महुआ की खली का उपयोग किया जाता है।

चूने का प्रयोग

चूने का उपयोग नर्सरी में मिट्टी की बनावट को सामान्य करने के साथ पानी के पी०एच० को सामान्य रखने हेतु प्रयोग किया जाता है। इसका प्रयोग मिट्टी के पी०एच० के आधार पर 200-350 कि०ग्रा० प्रति है० किया जाता है।

पैस्टिग/खादीकरण

मछलियों एवं मत्स्य बीज का प्राकृतिक भोजन प्लेटान है नर्सरियों में इनकी पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता के लिये स्पान संचय से 4 से 5 दिन पूर्व विभिन्न उर्वरकों के मिश्रण (जो पूर्व रूप से फार्मेन्ट हो गया है) को घोल के रूप में प्रसारित किया जाना है। इनके प्रयोग से तालाबों की उत्पादकता का स्तर बढ़ जाता है। तथा पैस्टिग से प्लैन्टान वांछित मात्रा में तैयार होते है।

श्रावकों के तालाबों में पोषण नियमित रूप से किया जाता है तथा श्रावकों पर परजीवी इत्यादि का निरीक्षण भी किया जाता है।